हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर संजय गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे। ‘कांटे’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्में बनाने वाले संजय गुप्ता के निधन की खबर शनिवार सुबह आई तो पूरी फिल्म इंडस्ट्री सन्न रह गई। Sanjay Gupta death की यह खबर इतनी अचानक आई कि उनके करीबी दोस्त और साथी कलाकार भी इस पर यकीन नहीं कर पा रहे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका निधन 30 अक्टूबर की रात मुंबई में उनके घर पर हुआ। कुछ रिपोर्ट्स में उनकी उम्र 57 साल बताई गई है, जबकि कुछ में 59 साल। उम्र को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
Sanjay Gupta Death: आखिर उस रात क्या हुआ?
मुंबई पुलिस के अनुसार संजय गुप्ता शुक्रवार देर रात घर में अपना संतुलन खो बैठे और गिर पड़े। गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट आई और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। नॉर्थ ज़ोन रीजन-1 के डीसीपी पुरुषोत्तम कराड ने बताया कि यह हादसा करीब आधी रात के आसपास हुआ। पुलिस के मुताबिक संजय गुप्ता अपने बंगले में पत्नी, दो बच्चों और घरेलू सहायक के साथ रहते थे।
पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत बताया है और साफ कहा है कि इसमें किसी साज़िश या गड़बड़ी का शक नहीं है।
एक दिलचस्प बात यह है कि गिरने की जगह को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे बाथरूम में फिसले थे, जबकि उनके दोस्त हनीफ चुनावाला ने एएनआई को बताया कि वे किचन में गिरे थे। सही जगह की पुष्टि परिवार या पुलिस की आगे की जानकारी से ही होगी।
दोस्त अशोक पंडित ने दी खबर की पुष्टि
फिल्ममेकर अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए संजय गुप्ता के निधन की पुष्टि की। उन्होंने इसे बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर बताया। उन्होंने संजय गुप्ता को अपना करीबी दोस्त और जोश से भरा फिल्ममेकर कहकर याद किया।
इंडस्ट्री के कई और लोगों ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। निर्देशक कुणाल कोहली ने लिखा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस खबर को कैसे स्वीकार करें। अभिनेता तुषार कपूर ने उन्हें अपना प्यारा डायरेक्टर बताया और कहा कि यह खबर याद दिलाती है कि ज़िंदगी कितनी अनिश्चित है।
1994 में ‘आतिश’ से शुरू हुआ था सफर
संजय गुप्ता ने 1994 में फिल्म ‘आतिश: फील द फायर’ से बतौर निर्देशक अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद करीब तीन दशक तक उन्होंने हिंदी सिनेमा में क्राइम थ्रिलर और स्टाइलिश एक्शन फिल्मों की अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्मों का रंग-ढंग, कैमरा वर्क और नियो-नॉयर अंदाज़ दर्शकों को अलग ही लगता था।
उनके करियर की कुछ अहम फिल्में:
- कांटे
- शूटआउट एट लोखंडवाला (इसके निर्माता भी वे थे)
- शूटआउट एट वडाला
- काबिल
- मुंबई सागा
- दस कहानियां (बतौर निर्माता)
अपने प्रोडक्शन बैनर व्हाइट फेदर फिल्म्स के जरिए भी उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स बनाए। उनकी आखिरी फिल्म ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ थी, जो 2025 में रिलीज़ हुई थी। इसमें हर्षवर्धन राणे और मीज़ान जाफरी ने काम किया था।
अंतिम संस्कार की जानकारी का इंतज़ार
फिलहाल परिवार की तरफ से अंतिम संस्कार को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। जैसे ही इस बारे में कोई आधिकारिक अपडेट आएगा, हम उसे आपके साथ साझा करेंगे।
Sanjay Gupta death से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा फिल्ममेकर खो दिया है, जिसने क्राइम थ्रिलर को एक नया अंदाज़ दिया। उनकी फिल्में उनके चाहने वालों के बीच हमेशा याद की जाएंगी।
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